गत दिवस भारतीय शिक्षण मंडल ब्रज प्रांत की बदायूं महिला शाखा के तत्वावधान में राधा रानी मंडल की संयोजिका डॉ निशी अवस्थी के संयोजन में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसके तहत “आत्मनिर्भर भारत में महिलाओं का योगदान” विषय पर सभी सदस्यों के द्वारा गहन विचार मंत्रणा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे को पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन कर किया गया। डॉ निशी अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही नारी हर क्षेत्र मे सशक्त रही है। मध्य काल मे थोड़ी गिरावट आई लेकिन आज पुनः नारी आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ रही है इसके लिए आवश्यक है कि वह शिक्षित हो,हर क्षेत्र का उसे ज्ञान हो तभी हम एक सशक्त समाज और सशक्त भारत दे सकेंगे।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण में स्त्री और पुरुष दोनों की समान सहभागिता आवश्यक है परंतु यह विडंबना ही रही है कि स्वतंत्र भारत की यात्रा में महिलाओं की स्वतंत्रता मात्र कागजों में छपे शब्दों तक ही सीमित रही, चाहे वह संविधान हो या कानून। स्वतंत्रता के 75वी वर्षगांठ हम मना रहे हैं परंतु आज भी ऐसी महिलाएं हैं जो गरीबी और अभाव में अपना जीवन बसर कर रही हैं उन्हें आत्मनिर्भरता के मायने तक नहीं पता है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अधूरी सी प्रतीत होती है। डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने बताया कि आज नारी किसी पर आश्रित नहीं बल्कि आत्मनिर्भर है। देश विदेश तक पहचान बनाते हुए शिक्षा से कारोबार तक अपना योगदान दे रही है। आत्मनिर्भर होते हुए लोगों को रोजगार तक देने वाली बन गयी है ,मही यानि पृथ्वी तक को हिलाने की ताकत रखती है। डॉ शिखा पाण्डेय ने कहा कि एक महिला को अगर सशक्त बनाया जाता है तो वे पूरे परिवार को सशक्त बनाने के साथ एक सशक्त समाज एवं सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एक शिक्षित महिला अपनी आने वाले पीढ़ी का भी उचित मार्गदर्शन करने में सक्षम होती है। महिलाओं की कार्यशक्ति बहुत ही प्रबल होती है अतः कार्यबल में महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी लाखों परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने और रोजगार पैदा करने में मदद कर रही है।

घरेलू कामों में उसे बाँध कर नही रखा जाना चाहिए। जिस प्रकार महिलाओं ने इस महँगाई के दौर में घर से बाहर निकल पुरुषों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया है, उसी प्रकार पुरुषों को भी घर के कामो में उसका हाथ बँटाकर उसका साथ देना चाहिए। डॉ सोनी मौर्य ने बताया कि हर युग में महिलाओं ने अपनी योग्यता का परचम लहराया है, लेकिन फिर भी यह देखने को मिलता है कि हर युग में उन्हें भेदभाव और उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा है। महिलाओं के प्रति भेदभाव और उपेक्षा को केवल साक्षरता और जागरूकता पैदा कर ही खत्म किया जा सकता है। महिलाओं का विकास देश का विकास है। महिलाओं की साक्षरता, उनकी जागरूकता और उनकी उन्नति ना केवल उनकी गृहस्थी के विकास में सहायक साबित होती है बल्कि उनकी जागरूकता एवं साक्षरता देश के विकास में भी अहम् भूमिका निभाती है। इसीलिए सरकार द्वारा आज के युग में महिलाओं की शिक्षा और उनके विकास पर बल दिया जा रहा है, गाँव और शहर में शिक्षा के प्रचार प्रसार के व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं।

डॉ इति अधिकारी ने बताया कि आज देश की महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ चुकी हैं जिसमें केंद्र की मोदी सरकार का व्यापक और महत्वपूर्ण योगदान है। यह पहली बार हुआ जब महिलाएं पूर्णकालिक तौर पर रक्षा वित्त विदेश और शिक्षा मंत्रलय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हुई हैं। डॉ अनीता सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत निर्माण में महिलाओं की महती भूमिका है आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाएं अगर पूर्ण रूप से देश के विकास में अपना योगदान देंगी तो 100% हमारा देश आगे बढ़ेगा। अंत में मंडल संयोजिका ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कल्याण मंत्र के साथ गोष्ठी का समापन किया गया। कार्यक्रम में डॉ निशि अवस्थी, सरला चक्रवर्ती, डॉ इति अधिकारी, डॉ सोनी मौर्य, अनीता सिंह, डॉ शिखा पाण्डेय,डॉ शुभ्रा माहेश्वरी आदि लोग उपस्थित रहे ।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी (बरेली मंडल)

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